नैतिकता की चाशनी में डुबे-डुबे,
नीतीश बाबू फूल कर रसगुल्ला हो गए...
पहले दूध के धुले थे जनाब,
अब फटे दूध के ढेला हो गए।।
लालू जी अपने शुरूआती दौर में काँग्रेस के 'मुखर' विरोधी थे,आज काँग्रेस लालूजी की 'मुखर' समर्थक...तो इसमें 'वक्त' भी लगा और 'समय' भी।
आप तो मोदी जी के कार्यकाल की शुरुआत से ठीक पहले NDA छोड़कर आये थे,उनके कार्यकाल के दौरान ही वापस लौटने के बहाने "ढूंढते" फिर रहे हैं।